संघर्ष:जीवन की कहानी
सजाए कहाँ मिलती सबको गुनाह ए साजिश रचने की,
हर शख्स तरकीब ढूंढ लेता गुनाह ए साजिश से बचने की,
कश्तियाँ तूफान में थपेड़े खाकर पार हो जाती,
ये कहानी हैं हकीकत की नहीं ये बात कहने की
सजाए कहाँ मिलती सबको गुनाह ए साजिश रचने की।
हुआ जो दर्द कोई तो दवा तैयार रखी है,
भुला दे दर्द को अपने दवा तैयार रखी हैं,
न ये गम कर ,दर्द कितना दिया सबने ,
याद कर तेरा दर्द किस किस ने बांटा हैं,
सदाये भूला दो सब की ,दवा तैयार रखी है,
निकल जा पथ के राही तू,
अभी मंजिल हैं तय करना,
जमाने भर के तानो को,
तुझे ले करके हैं चलना,
मुश्किलें लाख आये तो ,
मुश्किलों से नहीं डरना,
लड़कर मुश्किलों से तुझे ,
मंजिल को हैं तय करना।
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